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Supreme Court ruled that consensual gay sex is not a crime among adults.


सुप्रीम कोर्ट के गुरुवार को सुनाए ऐतिहासिक फ़ैसले के बाद अब भारत में समलैंगिकता अपराध नहीं है. भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में समलैंगिकता को अपराध माना गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटा दिया है. यानी अब दो वयस्कों के बीच सहमति से बनाए गए समलैंगिक संबंध को अपराध नहीं माना जाएगा. 24 साल चली कानूनी लड़ाई और कई अपीलों के बाद कोर्ट ने ये फ़ैसला सुनाया.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है

सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के साथ ही दिसंबर 2013 को सुनाए गए अपने ही फैसले को पलट दिया है। सीजेआई दीपक मिश्रा के साथ जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की संवैधानिक पीठ ने 10 जुलाई को मामले की सुनवाई शुरु की थी और 17 जुलाई को इस पर फैसला सुरक्षित रखा था।

The bench pronounced its verdict on 6 September 2018. Announcing the verdict, the court reversed its own 2013 decision of restoring Section 377 by ending the ban. The Supreme Court ruled that consensual gay sex is not a crime among adults, deeming the prior law "irrational, arbitrary and incomprehensible.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जीवन का अधिकार मानवीय अधिकार है। इस अधिकार के बिना बाकी अधिकार औचित्यहीन हैं। कोर्ट ने कहा कि समलैंगिकता पर किसी भी तरह की रोक संवैधानिक अधिकार का हनन है। किसी भी सामान्य व्यक्ति की तरह LGBTQ के लोगों को भी उतने ही अधिकार हैं। एक-दूसरे के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।

चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा ने अपने फ़ैसले में कहा, ''जो भी जैसा है उसे उसी रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए.

समलैंगिक लोगों को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है. इसे लेकर लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी.''

SC ने आज फैसला सुनाते हुए कहा कि एकांत में सहमति से बने संबंध अपराध नहीं है. लेकिन धारा 377 के अंतर्गत पशु से संभोग अपराध बना रहेगा. पांच जजों की पीठ में सबसे पहले चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने अपना और जस्टिस खानविलकर का फैसला पढ़ा.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने फैसला सुनाते हुए कहा, ''मैं जैसा हूँ, उसे वैसा ही स्वीकार किया जाए, आभिव्यक्ति और अपने बारे में फैसले लेने का अधिकार सबको है.''

चीफ जस्टिस ने कहा, ''समय के साथ बदलाव ज़रूरी है, संविधान में बदलाव करने की ज़रूरत इस वजह से भी है जिससे कि समाज मे बदलाव लाया जा सके. नैतिकता का सिद्धांत कई बार बहुमतवाद से प्रभावित होता है लेकिन छोटे तबके को बहुमत के तरीके से जीने को विवश नहीं किया जा सकता.'' सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ''हर व्यक्ति को गरिमा से जीने का हक है, सेक्सुअल रुझान प्राकृतिक है. इस आधार पर भेद भाव नहीं हो सकता. हर व्यक्ति को गरिमा से जीने का हक है. सेक्सुअल रुझान प्राकृतिक है. इस आधार पर भेद भाव नहीं हो सकतानिजता का अधिकार मौलिक अधिकार है, 377 इसका हनन करता है.''

सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला आते ही राजनीति से लेकर मनोरंजन जगत की बड़ी हस्तियां इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रही है.
  • फ़िल्मकार करण जौहर ने ट्वीट किया, ''ऐतिहासिक फ़ैसला. फ़ख़्र महसूस कर रहा हूं. समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करना समान अधिकारों के लिए बड़ी उपलब्धि. देश को उसकी ऑक्सीजन वापस मिली.''
  • अभिनेत्री प्रीति ज़िंटा ने ट्विटर पर लिखा, ''अगर आपके पास दिल है तो आप आज़ाद हैं कि आप चाहें जिसको प्यार करें. सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से बेहद खुश हूं.''
  • अभिनेत्री कोंकणा सेन शर्मा ने ट्वीट किया, ''हम जीत गए. शुक्रिया सुप्रीम कोर्ट, ऐसा फ़ैसला सुनाने के लिए.''
  • पत्रकार बरखा दत्त ने लिखा, ''दो दशक पहले का वो दिन मुझे आज भी याद है, जब धारा 377 को ख़त्म करने को लेकर मैंने याचिका साइन की थी. इतिहास आज बन रहा है. शुभकामनाएं और सभी को प्यार.''
  • कांग्रेस नेता शशि थरूर ने ट्वीट किया, ''ये जानकर खुशी हुई कि सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है. ये फ़ैसला मेरे विचारों को सही साबित करता है. ये उन बीजेपी सांसदों को जवाब है जो इस मुद्दे को लेकर लोकसभा में मेरा विरोध करते थे.'
  • कवि कुमार विश्वास और जिग्नेश मेवाणी ने भी सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया.
  • कांग्रेस के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से भी सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसले का स्वागत करते हुए लिखा, ''उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला समाज में और बराबरी लाएगा.''
  • सोनम कपूर ने इस फैसले पर खुशी जताते हुए ट्वीट किया, ''यही वो भारत है जिसमें मैं रहना चाहती हूं. उसमें नहीं जिसमें नफरत, कट्टरता, लिंग के आधार पर भेद-भाव और असहिष्णुता भरी हुई है. यही वो भारत है जिससे मुझे प्यार है.''
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